Guru Tatva Jagran 5 Shloka


गुरु को शरीर में समाहित करने वाले 5 श्लोक 

Guru Tatva Jagran 5 Shloka

 

गुरु के उन पांचों श्लोकों का उच्चारण करें जो अपने आप में प्रकृति निर्मित हैं और इन पांचों श्लोकों को भी में पहली बार ही उच्चरित कर रहा हूँ | जिसमें पूर्ण गुरुतत्त्व समाहित है और जिसमें गुरु स्वयं अपने शरीर में समाहित हो सकते हैं | हमारा पूर्ण रूप से समर्पण हो जाता है और एक दूसरे से पूर्ण सम्बन्ध स्थापित हो जाता है | एक तरह से देखा जाय तो गुरुतत्त्व अपने में जागृत चैतन्य और दीक्षित हो जाता है | 

 

Chant the five divine shlokas of the Guru which are created by nature itself and I am pronouncing these five shlokas also for the first time. In which full surrender is contained and in which the Guru himself can be immersed in the body. The disciple becomes completely surrendered and complete relationship with the Guru is established. In a way, the gurutatva is awakened and the disciple becomes fully enlightened and initiated.
 

Guru Tatva Jagran 5 Shloka

 

पूर्वां परेवां मदधं गुरुर्वै चैत्तन्य रूपं धारं धरेषं 
गुरुर्वै सतां दीर्घ मदैव तुल्यं गुरुर्वै प्रणम्यं गुरुर्वै प्रणम्यं ।

Poorvam Parevam Madadhm Gururvae Chaitanya Roopam Dharam Dharesham
Gururvae Satam Deergh Madaev Tulyam Gururvae Pranamyam Gururvae Pranamyam.

 

अचिन्तय रूपं अविकल्प रूपं ब्रह्मा स्वरूपं विष्णु स्वरूपं
रूद्र: त्वमेव परतं परब्रह्म रूपं गुरुर्वं प्रणम्यं गुरुर्वं प्रणम्यं

Avichintya Roopam Avikalap Roopam Brahma Swaroopma Vishnu Swaroopam
Rudra Tvamev Paratam Parbrahm Roopam Gururvam Pranamyam Gururvam Pranamyam


हे आदिदेवं प्रभवं परेशां अविचिन्तय रूपं हृदयस्थ रूपं
ब्रह्माण्ड रूप परमं प्रमितं प्रमेयं गुरुर्वै प्रणम्यं गुरुर्वै प्रणम्यं ।

Hey Adidevam Prabhavam Paresham Avichintiy Roopam Hridyusth Roopam
Brahmand Roop Paramam Pramitam Prameyam Gururvae Pranamyam Gururvae Pranamyam.

 

हृदयं त्वमेवं प्राणं त्वमेवं दैवं त्वमेवं ज्ञानं त्वमेवं
चैत्तन्य रूप मपरं तोहि देव नित्यं गुरुर्वै प्रणम्यं गुरुर्वै प्रणम्यं ।

Hrudyam Tvamevam Pranam Tvamevam Daivam Tvamevam Gyanam Tvamevam
Chaitnya Roop Maparam Tohi Dev Nityam Gururvae Pranamyam Gururvae Pranamyam.


अनादि अकल्पोर् पवां पूर्णनित्यं अजन्मां अगोचर अदिर्वां इत्यं 
अदीवां सरी पूर्ण मदैव रूपं गुरुर्वै प्रणम्यं गुरुर्वै प्रणम्यं ।

Anadi Akalpor Pawam Purn Nityam Ajanmam Agochar Adirvam Ityam
Adivaam Sareee Purn Madaev Roopme Gururvae Pranamyam Gururvae Pranamyam.

 

Click Here For The Audio of Guru Tatva Jagran 5 Shlokas
 


 Contact WhatsApp

Published on Apr 26th, 2020


Do NOT follow this link or you will be banned from the site!