Mantra To Know The Past Life


पूर्व जीवन दर्शन मंत्र

 

Purv Jeevan Darshay Matangi Mantra

भगवान् कृष्ण ने भगवत गीता में स्पष्ट किया है की आत्मा अजर अमर है और इसकी मृत्यु कभी नहीं होती | आत्मा केवल एक देह को त्याग कर दूसरी देह में प्रवेश करती है अपने कर्मों के अनुसार | कोई भी ऐसा समय नहीं था जब आत्मा नहीं थी और कोई भी ऐसा समय नहीं आएगा जब यह प्रकट नहीं होगी | 

 

Lord Krishna has explained in the Bhagavad Gita that the soul is immortal and never dies. The soul leaves only one body and enters another body according to its deeds. There was no time when there was no soul and there would be no time when it would not appear.

 

मनुष्य अपने कर्मों के कारण ही नई परिस्थितियों  में जन्म लेता है और उसी के कारण अपने जीवन को जीता है | अपने पूर्व जन्म के कर्मों के कारण हो वो राजा बनता है या दिन भर परिश्रम करने वाला मज़दूर बनता है | परन्तु चाहे राजा हो या रंक अपने पूर्व जन्म के कर्मों का अच्छा या बुरा फल उसे भोगना ही पड़ता है | 

 

Man is born in new circumstances only because of his past actions and because of that he lives his present life. Due to the deeds of his previous birth, he becomes a king or a laborer who works hard all day. But whether it is a king or a rake, he has to suffer the good or bad fruits of his previous birth deeds.


महाभारत कथा में प्रत्येक किरदार को अपने कर्मों के फलस्वरूप ही गति पाते हुए दिखाया गया है | वर्तमान में होने वाले सभी भाग्य और दुर्भाग्य का कारण केवल पिछले कर्मों से नहीं बल्कि पिछले जन्मों  से पता लगाया जा सकता है। पूर्व जन्म देखने के लिए साधक को अपने प्राणचक्षु जागृत करने पड़ते हैं | प्राण चक्षु केवल कुण्डलिनी जागरण के माध्यम से हो सकते हैं | जब साधक का सहस्रार चक्र जाग्रत होता है तो वह अपने प्राणों को किसी भी दिशा में निर्धारित कर सकता है और अपना पूर्व जन्म भी देख सकता है |


In the epic of Mahabharata, each character is shown getting his end as a result of his past life actions or Karmas. The reason for all the luck and misfortune that occurs in the present can be traced not only to past deeds but also to past lives. To see a past life, the seeker has to awaken his soul or Prana shakti. Prana Shakti can only occur through Kundalini awakening. When the Sahasrara Chakra of the seeker is awakened, he can set his life in any dimension and can also see his past birth.

 

ऐसी ही एक दिव्य साधना है भगवती मातंगी महाविद्या की जो सहस्रार चक्र के उन कमलों को प्रस्फुटित करती है जिसके माध्यम से हम अपने कई पूर्व जन्म प्रत्यक्ष कर सकते हैं और उन कर्मों के दुष्प्रभावों  का निदान कर सकते हैं |  इतना ही नहीं अपितु हम किसी दूसरे व्यक्ति के पूर्व जन्म के रहस्यों को भी जान पाते हैं |   इस प्रकार की साधना को केवल समर्थ और योग्य साधक ही करें | जो साधक अध्यात्म के क्षेत्र में नए हैं और कोई अनुभव नहीं है उनके हाथ में निराशा ही आएगी | 

 

One such divine practice is that of Bhagwati Mathangi Mahavidya, which illuminates the petals of the Sahasrara Chakra through which we can watch our many previous births and diagnose the ill effects of those deeds. Not only this, but we can also know the secrets of another person's previous birth. Please note that only  able and competent seekers should do this type of meditation. Those seekers who are new in the field of spirituality and have no experience will only have disappointment in their hands.

 

How To Perform Purv Jeevan Darshay Matangi Mantra

  • This Matangi sadhana can be performed only at night after 10 pm and is a 21 days sadhana.
  • The sadhak should wear Red colored dress or washed dhoti-kurta every day. 
  • Sit facing south direction and lit a ghee lamp.
  • Worship the Guru for success in mantra sadhana.
  • Wear Sanjeevani Gutika and chant 21 rosaries of Matangi Mantra with Energized Rakt Chandan Mala.
  • Do this for 21 days and sleep on the floor. 
  • Slowly and gradually you will have glimpses of past life and many scenes will unfold by itself.
  • After 21 days keep on chanting 1 mala daily.
  • इस साधना को रात में 10 बजे के बाद ही किया जा सकता है और यह 21 दिनों की साधना है।
  • साधक को हर दिन लाल रंग की पोशाक या धोती पहननी चाहिए।
  • दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें और घी का दीपक जलाएं।
  • मंत्र साधना में सफलता के लिए गुरु की पूजा करें।
  • संजीवनी गुटिका पहनें और प्राण प्रतिष्ठित रक्त चंदन माला के साथ मातंगी मंत्र की 21 माला जाप करें।
  • ऐसा 21 दिनों तक करें और भूमि शयन  ही करें | 
  • धीरे-धीरे और धीरे-धीरे आपके पास पिछले जीवन की झलकियाँ होंगी और कई दृश्य अपने आप सामने आ जाएंगे।
  • २१ दिनों के बाद प्रतिदिन १ माला जप करते रहें।

विनियोग:
अस्य संजीवनी मंत्रस्य मातंग ऋषि अनुष्टुप छंद:मातङ्गी देवता सर्व पूर्व जीवन दर्शन सिद्धयर्थं जपे विनियोग:

Viniyōga:
Asya san̄jīvanī mantrasya mātaṅga r̥ṣi anuṣṭupa chanda:Mātaṅgī dēvatā sarva pūrva jīvana darśana sid'dhayarthaṁ japē viniyōga:

ऋष्यादिन्यास  न्यास

ॐ मतङ्ग ऋषये  नमः शिरसि | 
ॐ अनुष्टुप छन्दसे नमः  मुखे 
ॐ मातङ्गी देवतायै  नमः हृदये  |  
ॐ पूर्व जन्म दर्शन प्रदायै नमः पादयो | 
ॐ मनो वाञ्छितं कार्य सिद्ध सिद्धायै नमः:कर सम्पुटे | 
ॐ ह्रीं नमः नाभौ विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे | 

R̥ṣyādin'yāsa  n'yāsa

'om mataṅga r̥ṣayē  namaḥ śirasi | 
'om anuṣṭupa chandasē namaḥ  mukhē 
'om mātaṅgī dēvatāyai  namaḥ hr̥dayē  |  
'om pūrva janma darśana pradāyai namaḥ pādayō | 
'om manō vāñchitaṁ kārya sid'dha sid'dhāyai namaḥ:Kara sampuṭē | 
'om hrīṁ namaḥ nābhau viniyōgāya namaḥ sarvāṅgē |

 
कर न्यास 
ॐ ह्रीं ऐं नमः - अंगुष्ठाभ्यां | 
ॐ श्रीं नमो भगवति नमः:- तर्जनीभ्यां | 
ॐ उच्छिष्ट चाण्डाली नमः:- मध्यमाभ्यां | 
ॐ श्री मतङ्गेश्वरी नमः - अनामिकाभ्यां  | 
ॐ पूर्व जन्म दर्शय नमः - कनष्ठिकीभयां 
ॐ स्वाहा नमः: करतलकर पृष्ठाभ्यां |

Kara n'yāsa 
'om hrīṁ aiṁ namaḥ - aṅguṣṭhābhyāṁ | 
'om śrīṁ namō bhagavati namaḥ:- Tarjanībhyāṁ | 
'om ucchiṣṭa cāṇḍālī namaḥ:- Madhyamābhyāṁ | 
'om śrī mataṅgēśvarī namaḥ - anāmikābhyāṁ  | 
'om pūrva janma darśaya namaḥ - kanaṣṭhikībhayāṁ 
'om svāhā namaḥ: Karatalakara pr̥ṣṭhābhyāṁ |

Purv Jeevan Darshay Matangi Mantra

ॐ ह्रीं ऐं श्रीं नमो भगवति उच्छिष्ट चाण्डाली श्री मतङ्गेश्वरी  पूर्व जन्म दर्शय स्वाहा |
'Om hrīṁ aing śrīṁ namō bhagavati ucchiṣṭa chāṇḍālī śrī mataṅgēśvarī  pūrva janma darśaya svāhā


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Published on May 3rd, 2020


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