Swarna Akarshana Bhairava Mantra


स्वर्णाकर्षण भैरव मन्त्र सिद्धि 

 

There are 64 Bhairavas. These 64 Bhairavas are grouped under eight categories and each category is headed by one major Bhairava. The major eight Bhairavas are called Ashtanga Bhairavas. The Ashta Bhairavas control the eight directions of this universe.

 

Swarna Akarshana Bhairava is the Bhairava who can bless you with gold and other material wealth. His Yantra emits the divine energy that would bless you with money, gold and other riches. Here, Gold is personified as Goddess Lakshmi; hence, being blessed with gold symbolizes the entrance of the Goddess in your living space. Its rituals lead to the achievement of gold and peace, nourishment, vashikaran, charms, mohan, maran, elevation, learning and every desire can be achieved.

 

यहां स्वर्णाकर्षण भैरव के बारे में बताया जा रहा है। इसके अनुष्ठान मात्र से स्वर्ण की उपलब्धि होती हैं और शांतिक, पौष्टिक, वशीकरण, आकर्षण, मोहन, मारण, उच्चाटन, विद्वेषण और स्तंभन को भी सिद्ध किया जा सकता है।

 

विनियोग

 

ॐ अस्य श्रीस्वर्णाकर्षणभैरवमंत्रस्य श्रीब्रह्मा ऋषिः । पंक्तिश्छन्दः । हरिहरब्रह्मात्मकस्वर्णाकर्षणभैरवो देवता ।

ह्रीं बीजम् । ह्रीं शक्तिः। ॐ कीलकम् स्वर्णराशिप्राप्तये स्वर्णाकर्षणभैरवमंत्रजपे विनियोगः । । 

 

ऋष्यादिन्यास 

ॐ ब्रह्मर्षये नमः शिरसि ॥ पंक्तिश्छन्दसे नमः मुखे ॥

स्वर्णाकर्षणभैरवदेवतायै नमः हृदि॥

ह्रीं बीजाय नमः गुह्ये ॥

ह्रीं शक्तये नमः पादयोः ॥

ॐ कीलकाय नमः सर्वाङ्गे।।

 

करन्यास

 

ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्धारणाय अंगुष्ठाभ्यां नमः ॥

ह्रां ह्रीं ह्रूं अजामलबद्धाय तर्जनीभ्यां नमः॥

लोकेश्वराय मध्यमाभ्यां नमः ॥

स्वर्णाकर्षणभैरवाय अनामिकाभ्यां नमः ॥

मम दारिद्र्यविद्वेषणाय कनिष्ठिकाभ्यां ॐनमः ॥

महाभैरवाय नमः ।

श्रीं ह्रीं ऐं करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः॥

 

हृदयादिषडंगन्यास

ऐं ह्रीं श्रीं ऐं श्रीं आपदुद्धारणाय हृदयाय नमः।।

ह्रां ह्रीं हूं अजामलबद्धाय शिरसे स्वाहा॥

लोकेश्वराय शिखायै वषट् ॥

स्वर्णाकर्षण भैरवाय कवचाय हुम् ॥

मम दादिद्र्यविद्वेषणाय नेत्रत्रयाय वौषट् ॥

महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं अस्त्राय फट् ॥

 

इस विधि से न्यास किया जाता है।

 

ध्यान

 

पीतर्णं चतुर्बाहुं त्रिनेत्रं पीतवाससम्। अक्षयस्वर्णमाणिक्यं तडित्पूरितापात्रकम्।।

अभिलषितं महाशूलं तोमरं चामरद्वयम्। सर्वाभरणसम्पन्नं मुक्ताहारोपशोभितम्।।

मदोन्मत्तं सुखासीनं भक्तानां च वरप्रदम् । सन्ततं चिन्तयेद्वश्यं भैरवं सर्वसिद्धिदम्॥

पारिजातमकान्तरस्थ मणिमण्डपे सिंहासनगतं ध्यायेद्भैरवं स्वर्णदायकम् ।

गाङ्गेयपात्रं डमरूं' त्रिशूलं वरं करैः सन्दधतं त्रिनेत्रम् । देव्यायुतं तप्तसुवर्णवर्णं स्वर्णाकृतिं भैरवमाश्रयामि॥


Swarna Akarshan Bhairava Mantra

"aing hreem shreem aing shreem aapaduddhaaranaay hraam hreem hroom ajaamalabaddhaay lokeshvaraay svarnaakarshan bhairavaay mam daaridryavidveshanaay mahaabhairavaay namah shreem hreem aing"


इसका सत्तावन अक्षरीय मंत्र और विधान इस भांति है:

'ऐं ह्रीं श्रीं ऐं श्रीं आपदुद्धारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं अजामलबद्धाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय मम दारिद्र्यविद्वेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं।

 

 

How To Siddh Swarna Akarshan Bhairava Mantra

 

  • आवरण पूजा का समापन करने के उपरांत धूपादि से नमस्कारांत तक पूजा, फिर ध्यान धरकर जप किया जाता है।
  • इसके पुरश्चरण में मंत्र के एक लाख जप का विधान है। ऐसी मान्यता है कि सुधी मांत्रिक को एक लाख जप के बाद उसके दशांश का होम खीर से करना चाहिए।
  • होम के दशांश का क्रमशः तर्पण, मार्जन और ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए। इससे मंत्र निस्संदेह सिद्धि को प्राप्त होता है।
  • सिद्ध मंत्र का यदि मांत्रिक दस हजार जप करे तो उसकी निर्धनता का नाश होता है और धन का पूर्ण वेग से आगमन होता है।
  • यदि मांत्रिक करवीर व जाती के पुष्पों और अड़हुल व अनार के लाल पुष्पों से होम करता है तो वह आठों सिद्धियां प्राप्त करता है।
  • खीर से होम किया जाए तो सर्वफलों की प्राप्ति होती है। हे देवि, घृत से होम किया जाए तो इहलोक व परलोक के फलों की प्राप्ति होती है।
  • चंदन की समिधाओं से होम करने वाले मांत्रिक की उत्तरोत्तर मंत्र सिद्धि होती है।

 


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Published on May 31st, 2021


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